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ई-वे बिल कब ज़रूरी है? दुकानदारों के लिए आसान गाइड

ई-वे बिल के नियम आसान भाषा में: ₹50,000 की सीमा (टैक्स समेत), पार्ट A और पार्ट B क्या है, 50 किलोमीटर वाला नियम, हर 200 किलोमीटर पर एक दिन की वैधता, छूट और जुर्माना।

ई-वे बिल नंबर और ₹50,000 की सीमा के साथ डिलीवरी ट्रक
इस लेख में
  1. मूल नियम: ₹50,000 से ज़्यादा का माल
  2. किसी भी कीमत पर ज़रूरी
  3. कब ज़रूरी नहीं
  4. पार्ट A और पार्ट B
  5. कितने दिन चलता है?
  6. असली हालात
  7. गलती, रद्द करना और जुर्माना
  8. ई-वे बिल बनाने का तरीका
  9. सवाल-जवाब
  10. स्रोत

जब ₹50,000 से ज़्यादा का माल गाड़ी से जाता है, तो GST क़ानून ई-वे बिल माँगता है — एक इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ जो माल निकलने से पहले सरकारी पोर्टल पर बनता है। इसके बिना माल और गाड़ी दोनों रोके जा सकते हैं और जुर्माना लग सकता है। इस गाइड में आसान भाषा में समझेंगे कि ई-वे बिल कब चाहिए, उसमें क्या भरा जाता है और वह कितने दिन चलता है।

मूल नियम: ₹50,000 से ज़्यादा का माल

जो रजिस्टर्ड व्यक्ति ₹50,000 से ज़्यादा कीमत की खेप (consignment) भेजता है, उसे माल चलने से पहले ई-वे बिल बनाना होता है। तीन बातें जो दुकानदार अक्सर भूल जाते हैं:

  • कीमत में GST शामिल है। बिल पर लगा CGST, SGST, IGST और cess — सब गिना जाता है। ₹45,000 का माल और 18% GST मिलाकर ₹53,100 बनता है — यानी ई-वे बिल ज़रूरी है, भले ही सिर्फ़ माल ₹50,000 से कम हो।
  • उसी बिल पर टैक्स-फ़्री सामान कीमत में नहीं गिना जाता।
  • बात माल चलने की है, सिर्फ़ बिक्री की नहीं। अपनी दूसरी ब्रांच में स्टॉक भेजना या सप्लायर को माल लौटाना भी माल का चलना है।

किसी भी कीमत पर ज़रूरी

दो मामलों में ₹50,000 से कम पर भी ई-वे बिल चाहिए:

  • जब मालिक (principal) दूसरे राज्य के जॉब वर्कर को माल भेजे।
  • जब GST रजिस्ट्रेशन से छूट वाला व्यक्ति हस्तशिल्प (handicraft) का माल दूसरे राज्य में भेजे।

कब ज़रूरी नहीं

  • माल बिना मोटर वाले साधन से जाए — जैसे हाथ-ठेला या साइकिल रिक्शा।
  • नियम 138 की सूची (annexure) वाला सामान, जैसे घरेलू LPG, राशन की दुकान से मिलने वाला केरोसिन, डाक का सामान, गहने, मुद्रा और घर का पुराना सामान।
  • ₹50,000 तक की खेप (चाहें तो फिर भी बना सकते हैं)।

पार्ट A और पार्ट B

ई-वे बिल के दो हिस्से होते हैं:

  • पार्ट A — सप्लायर और ख़रीदार का GSTIN, डिलीवरी की जगह और उसका PIN कोड, बिल या चालान का नंबर और तारीख़, कीमत, HSN कोड और माल भेजने की वजह। इसे सप्लायर या ख़रीदार भरता है।
  • पार्ट B — सड़क से जाने पर गाड़ी का नंबर (रेल, हवाई या जहाज़ से जाने पर ट्रांसपोर्ट दस्तावेज़ का नंबर)। इसे ट्रांसपोर्टर भरता है, या अपनी गाड़ी हो तो आप।

50 किलोमीटर वाला नियम: जब माल आपके ही राज्य में, आपकी दुकान से ट्रांसपोर्टर की जगह तक 50 किमी के अंदर आगे भेजने के लिए जाए, तो उस हिस्से के लिए पार्ट B ख़ाली छोड़ सकते हैं।

अगर आप ई-इनवॉइस बनाते हैं, तो पार्ट A दोबारा टाइप करने की जगह ई-इनवॉइस के IRN से भर सकते हैं।

कितने दिन चलता है?

वैधता दूरी पर निर्भर है:

  • आम माल: 200 किमी तक एक दिन, और उसके बाद हर 200 किमी या उसके हिस्से पर एक दिन और। (31 दिसंबर 2020 तक यह 100 किमी प्रति दिन था।)
  • बहुत बड़े आकार का माल (over-dimensional cargo): हर 20 किमी पर एक दिन।

एक “दिन” ई-वे बिल बनने के अगले दिन की आधी रात को ख़त्म होता है।

दूरीवैधता
150 किमी1 दिन
380 किमी2 दिन
650 किमी4 दिन

अगर माल देर से पहुँचे — गाड़ी ख़राब हो जाए, हड़ताल हो — तो ट्रांसपोर्टर वैधता ख़त्म होने के आसपास पोर्टल पर वजह और बची दूरी बताकर ई-वे बिल बढ़ा सकता है।

असली हालात

हालातई-वे बिल?
₹42,000 का माल + 18% GST = ₹49,560, राज्य के अंदर टेम्पो से₹50,000 वाले नियम में नहीं (अपने राज्य की सीमा देख लें)
₹45,000 का माल + 18% GST = ₹53,100, ट्रक सेहाँ — GST कीमत में गिना जाता है
₹80,000 का माल, 2 किमी दूर हाथ-ठेले सेनहीं — बिना मोटर का साधन
₹20,000 का माल दूसरे राज्य के जॉब वर्कर कोहाँ — दूसरे राज्य में जॉब वर्क

गलती, रद्द करना और जुर्माना

  • ई-वे बिल बनने के बाद बदला नहीं जा सकता; सिर्फ़ पार्ट B (गाड़ी) अपडेट हो सकता है। कुछ गलत हो तो 24 घंटे के अंदर रद्द करें और नया बनाएँ।
  • ख़रीदार 72 घंटे के अंदर इसे अस्वीकार कर सकता है; कुछ न करे तो इसे स्वीकार माना जाता है।
  • ज़रूरी दस्तावेज़ के बिना टैक्स वाला माल ले जाने पर ₹10,000 या जितना टैक्स बनता है — जो ज़्यादा हो — उतना जुर्माना लग सकता है, और माल व गाड़ी रोकी जा सकती है।
  • छोटी लिखावट वाली गलतियों पर — जैसे दस्तावेज़ नंबर में टाइपिंग की चूक — CBIC के सर्कुलर के अनुसार माल रोकने की जगह छोटा तय जुर्माना लगता है।

ई-वे बिल बनाने का तरीका

  1. अपनी GST लॉगिन जानकारी से ई-वे बिल पोर्टल (ewaybillgst.gov.in) पर साइन इन करें।
  2. Generate new चुनें और अपने बिल से पार्ट A भरें।
  3. पार्ट B में गाड़ी का नंबर भरें, या ट्रांसपोर्टर के लिए छोड़ दें।
  4. सबमिट करें और ई-वे बिल नंबर ड्राइवर को दें — काग़ज़ पर या फ़ोन पर।

रोज़ कई ई-वे बिल बनते हैं? पोर्टल एक साथ कई बिल बनाने (bulk) के लिए JSON फ़ाइल लेता है। ApnaInventory आपके बिक्री के बिल से यह JSON बना देता है: गाड़ी नंबर और दूरी भरें, वह पहले HSN, GSTIN और PIN कोड जाँचता है और जो कमी है वह बताता है, फिर आप फ़ाइल पोर्टल पर अपलोड करें। सबसे पहले सही बिल ज़रूरी है — देखें GST बिल कैसे बनाएँ। कम्पोज़िशन स्कीम में आप दूसरे राज्य में बेच ही नहीं सकते — पढ़ें GST कम्पोज़िशन स्कीम क्या है।

सवाल-जवाब

क्या ₹50,000 से कम के माल पर ई-वे बिल चाहिए?

केंद्रीय नियम के अनुसार नहीं — सिवाय दूसरे राज्य में जॉब वर्क और हस्तशिल्प के माल के। आपका राज्य अपने अंदर माल भेजने के लिए अलग नियम रख सकता है।

क्या ₹50,000 में GST शामिल है?

हाँ। खेप की कीमत में बिल पर लगा CGST, SGST या IGST और cess शामिल है।

क्या ई-वे बिल की गलती सुधार सकते हैं?

बदलकर नहीं। बनने के 24 घंटे के अंदर रद्द करें और नया बनाएँ। सिर्फ़ पार्ट B में गाड़ी की जानकारी अपडेट हो सकती है।

ट्रांसपोर्टर से भेजें तो पार्ट B कौन भरेगा?

आम तौर पर ट्रांसपोर्टर। अपने राज्य में ट्रांसपोर्टर की जगह तक 50 किमी तक के पहले हिस्से के लिए पार्ट B ज़रूरी नहीं।

स्रोत

जानकारी 2 नवंबर 2026 को जाँची गई। आपके राज्य और आपके माल के नियम अलग हो सकते हैं — अपने CA से पुष्टि कर लें।

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