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GST बिल कैसे बनाएँ: इनवॉइस में क्या-क्या ज़रूरी है

GST टैक्स इनवॉइस में कौन-कौन सी जानकारी लिखना ज़रूरी है, CGST-SGST और IGST कब लगता है, HSN कोड कितने अंक का हो, ₹200 और ₹50,000 के नियम — रुपये के उदाहरण के साथ आसान भाषा में।

GST टैक्स इनवॉइस की चेकलिस्ट — GSTIN, HSN कोड और CGST, SGST, IGST की लाइनें
इस लेख में
  1. टैक्स इनवॉइस कब देना ज़रूरी है
  2. चेकलिस्ट: GST टैक्स इनवॉइस में क्या-क्या होना चाहिए
  3. HSN कोड कितने अंक का हो?
  4. CGST + SGST या IGST? यह सप्लाई की जगह से तय होता है
  5. भरा हुआ उदाहरण
  6. जब आपकी कीमत में GST पहले से शामिल हो
  7. छोटी बिक्री और काउंटर पर आने वाले ग्राहक
  8. ई-इनवॉइस: क्या आपको इसकी ज़रूरत है?
  9. आम गलतियाँ और उनसे कैसे बचें
  10. सवाल-जवाब
  11. स्रोत

GST बिल सिर्फ़ रसीद नहीं है। इसी से ख़रीदार इनपुट टैक्स क्रेडिट लेता है, इसी को GST विभाग जाँचता है और यही बताता है कि आपने क्या बेचा। बिल की ज़्यादातर गलतियाँ छोटी होती हैं — GSTIN छूट गया, गलत टैक्स लग गया, HSN नहीं लिखा — पर इन्हीं से ग्राहक का क्रेडिट अटकता है और नोटिस तक आ जाते हैं।

इस गाइड में देखेंगे कि CGST नियम 46 के हिसाब से बिल में क्या-क्या ज़रूरी है, रुपये के साथ एक भरा हुआ उदाहरण, और दुकानदारों की सबसे आम गलतियाँ।

टैक्स इनवॉइस कब देना ज़रूरी है

  • सामान (goods): सामान दुकान या गोदाम से निकलने से पहले या उसी समय, या ख़रीदार को डिलीवरी के समय।
  • सेवा (services): सेवा देने के 30 दिन के अंदर (बैंक और बीमा कंपनियों के लिए 45 दिन)।
  • सामान के बिल की कॉपी: तीन — Original for recipient (ख़रीदार के लिए), Duplicate for transporter (ट्रांसपोर्टर के लिए) और Triplicate for supplier (आपके लिए)। सेवा के लिए दो कॉपी काफ़ी हैं।

छपा बिल हो या WhatsApp पर PDF — दोनों चलते हैं, बस नीचे की हर जानकारी उसमें हो।

चेकलिस्ट: GST टैक्स इनवॉइस में क्या-क्या होना चाहिए

नियम 46 में ये जानकारियाँ गिनाई गई हैं। बिल का फ़ॉर्मेट बनाते समय या बिल भेजने से पहले इस तालिका से मिलान कर लें।

#क्या लिखना हैकब और कैसे
1आपका नाम, पता और GSTINठीक वैसा जैसा रजिस्ट्रेशन में है
2इनवॉइस नंबरलगातार क्रम में, ज़्यादा से ज़्यादा 16 अक्षर, पूरे वित्त वर्ष में एक ही बार। अक्षर, अंक, हाइफ़न (-) और स्लैश (/) चल सकते हैं
3इनवॉइस की तारीख़जिस दिन बिल बना
4ख़रीदार का नाम, पता और GSTINजब ख़रीदार रजिस्टर्ड हो
5ख़रीदार का नाम-पता, डिलीवरी का पता, राज्य का नाम और कोडजब ख़रीदार रजिस्टर्ड न हो और बिल ₹50,000 या उससे ज़्यादा का हो (इससे कम पर, अगर ख़रीदार माँगे)
6HSN कोड (सामान) या SAC (सेवा)4 या 6 अंक — नीचे देखें
7सामान या सेवा का विवरणक्या बेचा
8मात्रा और यूनिटसामान के लिए: pcs, kg, box …
9कुल कीमत
10छूट के बाद टैक्स लगने वाली कीमत (taxable value)GST इसी पर लगता है
11टैक्स की दरCGST और SGST, या IGST (और cess हो तो वह भी)
12टैक्स की रक़महर टैक्स अलग-अलग
13सप्लाई की जगह (place of supply), राज्य के नाम के साथदूसरे राज्य में बिक्री पर
14डिलीवरी का पताअगर सप्लाई की जगह से अलग हो
15टैक्स रिवर्स चार्ज पर देना है या नहींदुकान के लिए आम तौर पर “नहीं”
16हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षरआपके या आपके अधिकृत व्यक्ति के
17IRN वाला QR कोडसिर्फ़ ई-इनवॉइस पर (नीचे देखें)

HSN कोड कितने अंक का हो?

अधिसूचना 78/2020–केंद्रीय कर के अनुसार यह पिछले वित्त वर्ष के आपके कुल टर्नओवर (aggregate turnover) पर निर्भर है:

  • ₹5 करोड़ तक: 4 अंक का HSN कोड। बिना रजिस्ट्रेशन वाले ग्राहकों (B2C) के बिल पर इसे छोड़ सकते हैं।
  • ₹5 करोड़ से ज़्यादा: हर बिल पर 6 अंक का HSN कोड।

उदाहरण: टीवी सेट हेडिंग 8528 में आते हैं, टूथपेस्ट 3306 में और नहाने का साबुन 3401 में। हर सामान के साथ HSN एक बार सेव कर दें, ताकि वह हर बिल पर अपने-आप छपे।

CGST + SGST या IGST? यह सप्लाई की जगह से तय होता है

टैक्स का प्रकार इससे तय होता है कि माल कहाँ जा रहा है:

  • अपने ही राज्य में: दर को दो बराबर हिस्सों में बाँटें — CGST और SGST।
  • दूसरे राज्य में: पूरी दर IGST के रूप में लगाएँ, और सप्लाई की जगह राज्य के नाम के साथ लिखें।

भरा हुआ उदाहरण

कानपुर (उत्तर प्रदेश, राज्य कोड 09) की शर्मा इलेक्ट्रॉनिक्स एक रजिस्टर्ड डीलर को एक LED टीवी बेचती है। 22 सितंबर 2025 से टीवी सेट पर 18% GST है।

डीलर लखनऊ (UP) मेंडीलर पटना (बिहार) में
टैक्स लगने वाली कीमत₹30,000₹30,000
CGST 9%₹2,700—
SGST 9%₹2,700—
IGST 18%—₹5,400
बिल की कुल रक़म₹35,400₹35,400

कुल रक़म बराबर है, बस टैक्स का बँटवारा बदलता है। बँटवारा गलत हुआ तो डीलर का क्रेडिट मेल नहीं खाएगा और क्रेडिट नोट काटकर नया बिल बनाना पड़ेगा।

जब आपकी कीमत में GST पहले से शामिल हो

दुकान की ज़्यादातर कीमतों में टैक्स शामिल होता है। टैक्स लगने वाली कीमत निकालने के लिए कीमत को (1 + दर) से भाग दें। 18% वाले ₹590 के सामान की टैक्स लगने वाली कीमत ₹590 ÷ 1.18 = ₹500 और GST ₹90 होगा — राज्य के अंदर बिक्री पर CGST ₹45 और SGST ₹45।

छोटी बिक्री और काउंटर पर आने वाले ग्राहक

  • ₹200 से कम: अगर ग्राहक रजिस्टर्ड नहीं है और बिल नहीं माँगता, तो अलग इनवॉइस बनाना ज़रूरी नहीं। लेकिन दिन के आख़िर में ऐसी सारी बिक्री का एक समेकित (consolidated) टैक्स इनवॉइस बनाना ज़रूरी है।
  • बिना रजिस्ट्रेशन वाले ख़रीदार को ₹50,000 या ज़्यादा: ख़रीदार का नाम-पता, डिलीवरी का पता और राज्य का नाम व कोड बिल पर होना चाहिए।

उदाहरण: किराना दुकान ने ₹150 का टूथपेस्ट ऐसे ग्राहक को बेचा जिसे बिल नहीं चाहिए — यह उस दिन के समेकित इनवॉइस में जाएगा। किसी स्कूल (जो GST में रजिस्टर्ड नहीं) के लिए ₹62,000 की स्टील अलमारियों के बिल पर स्कूल का नाम, पता और डिलीवरी का पता लिखना ज़रूरी है।

ई-इनवॉइस: क्या आपको इसकी ज़रूरत है?

अगर 2017-18 से अब तक किसी भी वित्त वर्ष में आपका कुल टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज़्यादा रहा है, तो रजिस्टर्ड ख़रीदारों के आपके बिल ई-इनवॉइस होने चाहिए: हर बिल Invoice Registration Portal (IRP) पर दर्ज होता है, जो IRN और QR कोड लौटाता है — यह QR बिल पर छपता है। यह सीमा 1 अगस्त 2023 से लागू है (अधिसूचना 10/2023–केंद्रीय कर)। ज़्यादातर छोटी दुकानें इससे नीचे हैं, पर कारोबार बढ़े तो इस पर नज़र रखें।

आम गलतियाँ और उनसे कैसे बचें

  1. ख़रीदार का GSTIN गलत टाइप — उसका क्रेडिट नहीं दिखेगा। हर GSTIN पार्टी लिस्ट में एक बार सेव करें और वहीं से चुनें।
  2. लोकल बिक्री पर IGST, या बाहर की बिक्री पर CGST/SGST — हर बार सप्लाई की जगह देखकर तय करें।
  3. साल के बीच इनवॉइस नंबर दोहराना — हर वित्त वर्ष की एक सीरीज़ रखें, जैसे INV/26-27/0001।
  4. टैक्स के बाद छूट घटाना — जब छूट बिल पर लिखी हो, तो GST छूट के बाद वाली कीमत पर लगता है।
  5. B2B बिल पर HSN न होना — हर सामान के साथ HSN सेव रखें।
  6. दर बदलने के बाद भी पुरानी दर — 22 सितंबर 2025 को कई सामानों की दर बदली है, अपनी सामान-सूची जाँच लें।

ApnaInventory की GST बिलिंग में GSTIN, HSN, सप्लाई की जगह और CGST/SGST या IGST का बँटवारा आपके सामान और पार्टी की जानकारी से अपने-आप आता है — हर बिल पर ऊपर की सारी जानकारी, बिना दोबारा टाइप किए। अगर आप ₹50,000 से ज़्यादा का माल भेजते हैं तो पढ़ें ई-वे बिल कब ज़रूरी है। किसी दूसरे ऐप से आ रहे हैं? देखें Vyapar या myBillBook से डेटा कैसे लाएँ।

सवाल-जवाब

क्या हाथ से लिखा GST बिल मान्य है?

हाँ, अगर उसमें नियम 46 की सारी जानकारी हो और नंबर क्रम से चलें। बिलिंग ऐप से बस टैक्स और जोड़ की गलतियाँ कम होती हैं।

क्या पूरे दिन की बिक्री का एक ही बिल बना सकते हैं?

सिर्फ़ ₹200 से कम की उन बिक्रियों के लिए जिनमें ग्राहक रजिस्टर्ड नहीं और बिल नहीं माँगता — दिन के आख़िर में एक समेकित टैक्स इनवॉइस। बाक़ी हर बिक्री का अलग बिल चाहिए।

टैक्स इनवॉइस और बिल ऑफ़ सप्लाई में क्या फ़र्क है?

टैक्स इनवॉइस में लगाया गया GST दिखता है। बिल ऑफ़ सप्लाई में कोई टैक्स नहीं होता — इसे कम्पोज़िशन डीलर और सिर्फ़ टैक्स-फ़्री सामान बेचने वाले देते हैं।

क्या दो काउंटर के लिए अलग-अलग बिल सीरीज़ रख सकते हैं?

हाँ। नियम 46 एक या ज़्यादा सीरीज़ की इजाज़त देता है, बस हर नंबर वित्त वर्ष में एक ही बार आए और 16 अक्षर से लंबा न हो — जैसे एक काउंटर के लिए A/26-27/0001 और दूसरे के लिए B/26-27/0001।

मेरा टर्नओवर ₹3 करोड़ है, क्या ई-इनवॉइस ज़रूरी है?

नहीं। ई-इनवॉइस तब ज़रूरी है जब 2017-18 से अब तक किसी भी वित्त वर्ष में आपका कुल टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज़्यादा रहा हो।

स्रोत

जानकारी 2 नवंबर 2026 को जाँची गई। GST के नियम समय-समय पर बदलते हैं — अपने मामले के लिए अपने CA से पुष्टि कर लें।

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  • हर बिल पर HSN, सप्लाई की जगह और टैक्स
  • A4 या थर्मल प्रिंट, या WhatsApp पर भेजें
  • बिल पर UPI QR

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