GST कम्पोज़िशन स्कीम क्या है? छोटी दुकान के लिए पूरी जानकारी
कम्पोज़िशन स्कीम आसान भाषा में: कौन ले सकता है, व्यापारियों के लिए 1% टैक्स, बिल ऑफ़ सप्लाई, इनपुट टैक्स क्रेडिट क्यों नहीं, CMP-08 और GSTR-4 की तारीख़ें, और रुपये में एक पूरा उदाहरण।

इस लेख में
कम्पोज़िशन स्कीम में छोटा कारोबार हर बिल पर टैक्स निकालने की जगह अपने टर्नओवर का एक छोटा, तय हिस्सा GST के रूप में देता है — और रिटर्न भी कम भरने पड़ते हैं। सुनने में फ़ायदे का सौदा लगता है, पर इसकी असली शर्तें भी हैं: इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं, बिल पर GST नहीं, और दूसरे राज्य में बिक्री नहीं। इस गाइड में नियम समझेंगे और एक हिसाब वाले उदाहरण से देखेंगे कि स्कीम कब पैसा बचाती है और कब नुक़सान कराती है।
कौन ले सकता है
- जिनका पिछले वित्त वर्ष का कुल टर्नओवर ₹1.5 करोड़ तक रहा।
- अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तराखंड में यह सीमा ₹75 लाख है।
- सेवा देने वालों के लिए अलग कम्पोज़िशन विकल्प है, ₹50 लाख तक के टर्नओवर के लिए।
आप यह स्कीम नहीं ले सकते, अगर आप:
- दूसरे राज्य में माल या सेवा बेचते हैं;
- ऐसा माल सप्लाई करते हैं जिस पर GST लगता ही नहीं;
- कैज़ुअल या नॉन-रेज़िडेंट टैक्सेबल पर्सन हैं;
- आइसक्रीम, पान मसाला या तंबाकू जैसे अधिसूचित सामान बनाते हैं।
टैक्स की दरें
टैक्स राज्य के अंदर के आपके टर्नओवर का प्रतिशत है, जो आप अपनी जेब से देते हैं:
| कारोबार का प्रकार | दर | बँटवारा |
|---|---|---|
| व्यापारी (बाक़ी योग्य सप्लायर) | टैक्स वाले टर्नओवर का 1% | 0.5% CGST + 0.5% SGST |
| निर्माता (manufacturer) | टर्नओवर का 1% | 0.5% CGST + 0.5% SGST |
| रेस्टोरेंट सेवा | 5% | 2.5% CGST + 2.5% SGST |
| सेवा देने वाले (अलग स्कीम) | 6% | 3% CGST + 3% SGST |
व्यापारियों के लिए 1% सिर्फ़ टैक्स वाले टर्नओवर पर है, यानी जिस सामान पर GST नहीं लगता, उसकी बिक्री पर यह टैक्स नहीं।
कौन-से नियम मानने होंगे
- टैक्स इनवॉइस की जगह बिल ऑफ़ सप्लाई दें, जिसके ऊपर लिखा हो “composition taxable person, not eligible to collect tax on supplies”।
- ग्राहक से GST न लें।
- इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं — ख़रीद पर दिया GST आपकी लागत बन जाता है।
- हर दुकान या कारोबार की जगह के बोर्ड पर “Composition Taxable Person” लिखें।
- रिवर्स चार्ज वाली किसी ख़रीद पर टैक्स फिर भी आम दर से देना होता है।
रिटर्न और तारीख़ें
- CMP-08 हर तिमाही, टैक्स जमा करने के लिए — तिमाही ख़त्म होने के अगले महीने की 18 तारीख़ तक।
- GSTR-4 साल में एक बार — वित्त वर्ष ख़त्म होने के बाद 30 जून तक (वित्त वर्ष 2024-25 से; पहले यह 30 अप्रैल था)।
- स्कीम लेने के लिए: वित्त वर्ष शुरू होने से पहले, यानी 31 मार्च तक CMP-02 भरें, और रखे हुए स्टॉक का क्रेडिट वापस करने के लिए 60 दिन के अंदर ITC-03 भरें।
अगर साल के बीच टर्नओवर सीमा पार कर जाए, तो स्कीम का विकल्प ख़त्म हो जाता है और आप रेगुलर स्कीम में आ जाते हैं — जैसे ही ऐसा होता दिखे, अपने CA से बात करें।
क्या यह सस्ती पड़ती है? हिसाब वाला उदाहरण
दो दुकानें लीजिए, दोनों साल में टैक्स से पहले ₹50 लाख का माल बेचती हैं, ज़्यादातर काउंटर पर आने वाले ग्राहकों को छपे दाम पर। (आसान रखने के लिए: स्टॉक में बदलाव नहीं, कोई और ख़र्च नहीं।)
दुकान A — किराना, ज़्यादातर 5% वाला सामान, बिक्री दाम से 10% कम पर ख़रीद
| रेगुलर GST | कम्पोज़िशन | |
|---|---|---|
| सप्लायर को दिया (₹45 लाख + 5% GST) | ₹47,25,000 | ₹47,25,000 |
| ग्राहकों से मिला | ₹52,50,000 | ₹52,50,000 |
| सरकार को दिया GST | ₹25,000 | ₹52,500 (₹52.5 लाख का 1%) |
| मुनाफ़ा | ₹5,00,000 | ₹4,72,500 |
रेगुलर स्कीम में दुकान सिर्फ़ फ़र्क़ चुकाती है — ग्राहकों से लिया टैक्स (₹2,50,000) घटा ख़रीद पर दिया टैक्स (₹2,25,000)। कम्पोज़िशन में क्रेडिट नहीं मिलता और पूरे टर्नओवर का 1% देना पड़ता है — यानी ₹27,500 कम कमाई।
दुकान B — 18% वाला सामान (जैसे कॉस्मेटिक या छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स), बिक्री दाम से 20% कम पर ख़रीद
| रेगुलर GST | कम्पोज़िशन | |
|---|---|---|
| सप्लायर को दिया (₹40 लाख + 18% GST) | ₹47,20,000 | ₹47,20,000 |
| ग्राहकों से मिला | ₹59,00,000 | ₹59,00,000 |
| सरकार को दिया GST | ₹1,80,000 | ₹59,000 (₹59 लाख का 1%) |
| मुनाफ़ा | ₹10,00,000 | ₹11,21,000 |
यहाँ कम्पोज़िशन में ₹1,21,000 ज़्यादा बचते हैं — क्योंकि बिक्री और ख़रीद के GST का बड़ा फ़र्क़ दुकान के पास रह जाता है।
सीख: कम्पोज़िशन उन दुकानों को ज़्यादा जमती है जो अपने ही राज्य में ग्राहकों को अच्छे मुनाफ़े पर ऊँची दर वाला सामान बेचती हैं। कम दर वाले सामान और पतले मुनाफ़े पर यह कम जमती है — और जब ख़रीदार कारोबारी हों तो नुक़सान करती है, क्योंकि वे आपके बिल ऑफ़ सप्लाई पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले सकते।
कब ठीक है, कब नहीं
आम तौर पर ठीक
- ज़्यादातर बिक्री अपने राज्य के आम ग्राहकों को।
- आपके सामान पर 18% GST है और मुनाफ़ा अच्छा है।
- आप कम रिटर्न और आसान हिसाब चाहते हैं।
दोबारा सोचें
- कई ग्राहक ऐसे कारोबारी हैं जिन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट चाहिए।
- आप अभी या जल्द दूसरे राज्यों में बेचना चाहते हैं।
- आप ज़्यादातर टैक्स-फ़्री या 5% वाला सामान पतले मुनाफ़े पर बेचते हैं।
- आप महँगी मशीन या उपकरण ख़रीदने वाले हैं — कम्पोज़िशन में उस पर क्रेडिट नहीं मिलेगा।
ApnaInventory में टैक्स मोड एक बार चुनें: रेगुलर GST बिल, कम्पोज़िशन के लिए बिल ऑफ़ सप्लाई, या रजिस्टर्ड नहीं हैं तो सादा बिल। बिक्री और ख़रीद की रिपोर्ट से तिमाही भुगतान का टर्नओवर मिल जाता है। रेगुलर GST के लिए देखें GST बिल कैसे बनाएँ, और माल भेजने के लिए ई-वे बिल कब ज़रूरी है।
सवाल-जवाब
क्या कम्पोज़िशन डीलर ऑनलाइन बेच सकता है?
1 अक्टूबर 2023 से कम्पोज़िशन डीलर ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म से माल बेच सकता है, लेकिन सिर्फ़ अपने राज्य के अंदर — प्लेटफ़ॉर्म दूसरे राज्य की बिक्री नहीं होने देगा।
क्या दूसरे राज्य से माल ख़रीद सकते हैं?
हाँ। रोक सिर्फ़ दूसरे राज्य में बेचने पर है। बस ख़रीद पर दिए GST का क्रेडिट नहीं मिलेगा।
क्या बिल पर GST अलग से दिखा सकते हैं?
नहीं। कम्पोज़िशन डीलर ग्राहक से टैक्स नहीं ले सकता, इसलिए बिल ऑफ़ सप्लाई पर GST नहीं दिखता।
क्या फिर भी हिसाब रखना होगा?
हाँ — बिक्री, ख़रीद और स्टॉक का रिकॉर्ड चाहिए, और इसी से आपका तिमाही टैक्स निकलता है।
स्रोत
- कौन ले सकता है, दरें, शर्तें, CMP-08 और स्कीम कैसे लें — कम्पोज़िशन लेवी फ़्लायर, GST काउंसिल / CBIC (नवंबर 2022 तक अपडेट)
- ₹1.5 करोड़ की सीमा और ₹75 लाख वाले राज्य — अधिसूचना 14/2019–केंद्रीय कर
- निर्माताओं और व्यापारियों की दरें (नियम 7) — अधिसूचना 50/2020–केंद्रीय कर
- वित्त वर्ष 2024-25 से GSTR-4 की तारीख़ 30 जून — अधिसूचना 12/2024–केंद्रीय कर
- 1 अक्टूबर 2023 से ई-कॉमर्स से माल बेचना (अधिसूचना 36/2023) — ICMAI का सारांश
जानकारी 2 नवंबर 2026 को जाँची गई। उदाहरण आसान रखा गया है — बदलने से पहले अपने CA के साथ अपना हिसाब ज़रूर लगाएँ।
बिल, स्टॉक और खाता — एक ही ऐप में
GST या सादे बिल बनाएँ, स्टॉक सही रखें और जानें किस पर कितनी उधारी है — फ़ोन, iPad या कंप्यूटर पर, हिन्दी या अंग्रेज़ी में।
- कम्पोज़िशन के लिए “बिल ऑफ़ सप्लाई” छपता है
- तिमाही भुगतान के लिए बिक्री-खरीद रिपोर्ट
- बाद में नए बिलों के लिए मोड बदलें


